अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस | महिला दिवस का इतिहास – Women’s Day Special

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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस

हम 8 मार्च को हर साल विश्व की प्रत्ये‍क महिला के सम्मान में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हैं। लेकिन महिला दिवस हम क्यों मानते है इसके बारे में मुश्किल ही कोई जानता होगा. आज हम आपको Mahila Diwas के इतिहास से रूबरू कराएँगे।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का महत्व

एक औरत की ज़िन्दगी कभी भी उसकी अपनी नहीं होती हैं. जन्म लेते ही वो समाज के अनचाहे बंधनो में बंध जाती हैं. उठने- बैठने के तरीके से लेकर उनके दोस्त का चुनाव भी परिवार decide करती है. एक लड़की को हमेशा ही ये महसूस कराया जाता है की उसका जीवन घर की चार दीवारी के अंदर होता हैं. एक नारी को उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता हैं. इसी मिथ को समाज से हटाने के लिए और महिलाओं को उनके अधिकारों साथ ही ये एहसास दिलाने के लिए वो किसी से काम नहीं है इसलिए ही mahila diwas मनाया जाता हैं.

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस का इतिहास

शायद आप इस बात से अनजान होंगे की विश्व में पहली बार महिला दिवस 28 फरवरी 1909 में Socialist Party of America अमेरिका द्वारा मनाया गया था। 1910 में clara zetkin नामक महिला ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का विचार सबके सामने रखा. उन्होंने सुझाव दिया की महिलाओ को अपनी मांगो को आगे बढ़ने के लिए हर देश में अंतराष्ट्रीय महिला दिवस मनाना चाहिए. एक कांफ्रेंस में 17 देशो की 100 से ज्यादा महिलाओ ने इस राय पर सहमती जताई और इस तरह अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की स्थापना हुई,

1913 में इसे ट्रांसफर कर 8 मार्च किया गया और तब से इसे हर साल  8 मार्च को मनाया जाता है. 1975 में पहली बार United Nation ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया.

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस क्यों मनाते हैं

कोई भी देश बिना महिलाओ के योगदान के प्रगति नहीं कर सकता. इसके लिए जरुरी है की लिंग असमानता को खत्म करने की तरफ कदम उठाये जाए. ऐसे कई देश है जहाँ आर्थिक और राजनतिक क्षेत्रो में महिलाओ की भागीदारी पुरुषो के मुकाबले बहुत कम है. शिक्षा के क्षेत्र में भी महिलाये पुरुषो की तुलना में पिछड़ी हुई है. नारी दिवस के दिन इन अमानताओ को दूर करने के लिए पूरे विश्व से महिलाये एक साथ एकत्रित होती है. कई देशो में महिलाये एकत्रित होकर मार्च, रैलीया निकलती है. इस दिन उन महिलाओ को सम्मानित किया जाता है जिन्होंने सभी असमानताओ से लड़ा और उपलब्धियाँ हासिल की.

 

आज हमारा देश हर रोज़ एक नए उपलब्धि हासिल कर रहा हैं लेकिन दुख की बात ये हैं की आज भी एक नारी को उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता हैं घर, परिवार और समाज का वास्ता देते हुए. उम्मीद करते है 2018 का महिला दिवस सभी स्त्रियों के जीवन में नई सुबह लाए.

 

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